प्राचीन समय से ही अश्वगंधा का इस्तेमाल आयुर्वेदिक पद्धति में औषधि के रूप में किया जाता रहा है. इस पौधे में कई ऐसे गुण है जो अनेकों बीमारियों से हमारा बचाव करती है.आज के समय में लोग अलग अलग तरीकों से इसका सेवन करते हैं. कुछ लोग अभी भी अश्वगंधा पाउडर खरीदकर उसका सेवन करते हैं तो कुछ लोग बाज़ार में मिलने वाले कैप्सूल को खाते हैं.
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- अश्गंधा के पाउडर का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार रोजाना एक या दो चम्मच (3-6 ग्राम) ही पर्याप्त है. आमतौर पर इसे पानी में उबालकर सेवन किया जाता है या फिर आप दूध में मिलाकर इसका काढ़ा बना ले और फिर पियें.
- आजकल के समय में बाज़ार में अश्वगंधा के कैप्सूल आसानी से मिल जाते हैं. इनमें अश्वगंधा एक्सट्रेक्ट की स्टैण्डर्ड मात्रा का इस्तेमाल होता है और इनकी गुणवत्ता काफी अच्छी होती है. डॉक्टर की सलाह पर आप रोजाना एक या कैप्सूल का सेवन कर सकते हैं.
- अश्वगंधा, चोबचीनी और आँवला सममात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर 6-6 ग्राम की मात्रा में नित्य सुबह-शाम दूध या जल से सेवन करने से 7 से 14 दिनों में ही समस्त प्रकार की वात-व्याधियाँ (वायु, शरीर निर्बलता, रवत विकार) इत्यादि दूर हो जाती है.
- बाल असमय सफेद होने के साथ ही झड़ने भी लगे हैं, तो आपको अश्वगंधा का 3-3 ग्राम दूध के साथ नित्य सेवन करना चाहिए। इससे आपकी समस्या का जरूर समाधान हो जाएगा.
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